ओम जैन की 🖋 से...
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देश के हालात पंचायत स्थर से पता चलते है कि गरीब को झोपड़ी बनाने के लिए दो गज जगह नसीब नही होती और रसूखदारों ओर भूमाफियों के लिए सीमाएं चाहे सरकारी जमीन हो या घर के आगे सड़क उस पर निर्माण का जैसे उनको लाइसेंस मिल जाता है।
बड़ा मुश्किल होता जा रहा है एक गरीब का अपनी छत का सपना ओर ऊंचे सम्बन्ध रखने वाले रोड की जमीनों पर भी घर बना रहे है अपना।
जहा एक ओर तो सरकारें बड़ा बड़ा दावा करती है अतिक्रमण ओर हटाती भी है शहरों में देखे तो गरीबो की दुकान उझाड़ना, थैले, थडिया या रोड पर अपना छोटा मोटा काम कर घर चलाने वाले तो अतिक्रमण के दायरे में आते है जिन्हें तुरन्त हटाया जाता है और गांवो में किसी ने घर के आगे एक दो सीढ़ी बना दी तो भी अतिक्रमण❓
चलो मान लेते है ये सब भी गलत है लेकिन क्या यह सही है कि बड़े नेताओं या रसूखदारों से सम्बंध रखने वाले सफेद कुर्ते/ शर्त ( नेताओ बनने वाले) को हर कही अतिक्रमण की छूट होती है, या फिर पंचायतें भी इनसे दबी होती है।
अगर पंचायत में कोई बेसहारा, या बेघर या गरीब जाकर कहे कि साहब मुझे इतना सा जमीन का टुकड़ा दो की मेरा परिवार भी एक कच्ची पक्की छत के नीचे रह सके तो शायद उसकी सुनवाई वाला कोई नही मिलेगा लेकिन वही दूसरी ओर इन गरीबो का हक छीनने वालो के खिलाफ रोज अखबार चाहे कितना ही चिख चीख कर बताए लेकिन शायद कागजो के दबाव से इन जिम्मेदारो के कानों में आवाज नही पहुचती ओर आंखों से पट्टी नही हटती।
ये एक तरफ गरीबो की आवाज दबाने का तो दूसरी ओर इन सफेद के पीछे काले कारनामे करने वालो को बढ़ावा देने का रास्ता आखिर कब तक ऐसे ही चलता रहेगा।
ऐसी स्थितियों के चलते सवाल ये पैदा होने लगते है कि क्या देश की सबसे पहली न्यायशाला पंचायत से ही भ्र्ष्टाचार से इंकार नही किया जा सकता ?, या फिर इन जिम्मेदारों की मिलीभगत ही कहा जा सकता है कि गरीब को दो गज जगह नही ओर अमीरों की नाजायत बिल्डिंगों को बनते देख भी ये चुप बैठे है।
ऐसी स्थितियों के कारण ही आज देश में इन लोगो के हौंसले बुलंद होते जा रहे है और इनके आगे जिम्मेदारों का झुकना देश को दलदल में पहुचा रहा इस बात से इंकार नही किया जा सकता है।
⚫ *जय हिंद* 🔴
🇮🇳 *जय भारत* 🇮🇳
💤 Omjain1211.d@gmail.com
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देश के हालात पंचायत स्थर से पता चलते है कि गरीब को झोपड़ी बनाने के लिए दो गज जगह नसीब नही होती और रसूखदारों ओर भूमाफियों के लिए सीमाएं चाहे सरकारी जमीन हो या घर के आगे सड़क उस पर निर्माण का जैसे उनको लाइसेंस मिल जाता है।
बड़ा मुश्किल होता जा रहा है एक गरीब का अपनी छत का सपना ओर ऊंचे सम्बन्ध रखने वाले रोड की जमीनों पर भी घर बना रहे है अपना।
जहा एक ओर तो सरकारें बड़ा बड़ा दावा करती है अतिक्रमण ओर हटाती भी है शहरों में देखे तो गरीबो की दुकान उझाड़ना, थैले, थडिया या रोड पर अपना छोटा मोटा काम कर घर चलाने वाले तो अतिक्रमण के दायरे में आते है जिन्हें तुरन्त हटाया जाता है और गांवो में किसी ने घर के आगे एक दो सीढ़ी बना दी तो भी अतिक्रमण❓
चलो मान लेते है ये सब भी गलत है लेकिन क्या यह सही है कि बड़े नेताओं या रसूखदारों से सम्बंध रखने वाले सफेद कुर्ते/ शर्त ( नेताओ बनने वाले) को हर कही अतिक्रमण की छूट होती है, या फिर पंचायतें भी इनसे दबी होती है।
अगर पंचायत में कोई बेसहारा, या बेघर या गरीब जाकर कहे कि साहब मुझे इतना सा जमीन का टुकड़ा दो की मेरा परिवार भी एक कच्ची पक्की छत के नीचे रह सके तो शायद उसकी सुनवाई वाला कोई नही मिलेगा लेकिन वही दूसरी ओर इन गरीबो का हक छीनने वालो के खिलाफ रोज अखबार चाहे कितना ही चिख चीख कर बताए लेकिन शायद कागजो के दबाव से इन जिम्मेदारो के कानों में आवाज नही पहुचती ओर आंखों से पट्टी नही हटती।
ये एक तरफ गरीबो की आवाज दबाने का तो दूसरी ओर इन सफेद के पीछे काले कारनामे करने वालो को बढ़ावा देने का रास्ता आखिर कब तक ऐसे ही चलता रहेगा।
ऐसी स्थितियों के चलते सवाल ये पैदा होने लगते है कि क्या देश की सबसे पहली न्यायशाला पंचायत से ही भ्र्ष्टाचार से इंकार नही किया जा सकता ?, या फिर इन जिम्मेदारों की मिलीभगत ही कहा जा सकता है कि गरीब को दो गज जगह नही ओर अमीरों की नाजायत बिल्डिंगों को बनते देख भी ये चुप बैठे है।
ऐसी स्थितियों के कारण ही आज देश में इन लोगो के हौंसले बुलंद होते जा रहे है और इनके आगे जिम्मेदारों का झुकना देश को दलदल में पहुचा रहा इस बात से इंकार नही किया जा सकता है।
⚫ *जय हिंद* 🔴
🇮🇳 *जय भारत* 🇮🇳
✍ पत्रकार ओम जैन शम्भूपुरा
चित्तौरगढ़ (राज.)💤 Omjain1211.d@gmail.com
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